मुंबई. (देश दुनिया). जानेमाने गीतकार गुलजार ने कहा है कि थियेटर के लिए लिखना चुनौती भरा काम है.राजधानी दिल्ली के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि फिल्म, रेडियो और मंच सभी अलग तरह के माध्यम होते हैं और किसी के लिए भी लिखने से पहले उसको समझना बेहद जरूरी है. स्टेज की जरूरत को समझकर ही उसके लिए लिखा जा सकता है और मुझे लगता है कि थियेटर के लिए लिखना आसान नहीं है. पड़ोसी मुल्क के साथ कभी बनते कभी बिगड़ते रिश्तों को लेकर पूछे गये एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के संबंधों को आम जनता की सोच से नहीं सुधारा जा सकता है बल्कि इसके लिए दोनों मुल्कों में प्रशासनिक स्तर पर पूरी ईमानदारी के साथ प्रयास करने होंगे. मेरी लेखनी किसी तरह का फैसला नहीं, बल्कि आम आदमी की प्रतिक्रिया मात्र है. थियेटर और फिल्म के अंतर के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘सीधे संबंध का सबसे बड़ा माध्यम थियेटर है. फिल्म के बारे में कहा जाता है कि यह कितने हफ्ते चली, जबकि थियेटर में रोज नये सिरे से प्रस्तुति देनी होती है. हमारे यहां अभिनय का प्रशिक्षण देने वाले संस्थान अभिनेता नहीं बल्कि शख्सियत पैदा कर रहे हैं.

No comments:
Post a Comment